क्या आपके साथ भी हुआ है—आपने “बस ट्राय करके देख लेते हैं” कहा, और कुछ हफ्तों बाद बैंक नोटिफिकेशन ने आपको पहले जगाया, फिर चिढ़ाया? फ्री ट्रायल का असली खेल वहीं है: जब आपकी ज़िंदगी व्यस्त हो, और आपकी याददाश्त उससे भी ज्यादा।
पहला दृश्य मुझे एक साधारण सोमवार की शाम जैसा लगता है। कोलोन में बारिश हल्की-हल्की थी, खिड़की पर बूंदें थीं, और मेरे दिमाग में काम की सूची। किसी क्लाइंट प्रोजेक्ट के लिए एक टूल चाहिए था—ऐसा जो “पहले सात दिन फ्री” कहकर मुस्कुराता है। मैंने सोचा, अभी काम बच जाए, बाद में तय कर लेंगे। तनाव साफ था: अगर टूल तुरंत न मिला तो डेडलाइन फिसलेगी, और अगर सब्सक्रिप्शन चल पड़ा तो मेरे मासिक खर्चों में एक और धागा जुड़ जाएगा, जिसे बाद में पकड़ना मुश्किल होगा।
मैंने ट्रायल शुरू किया। दो मिनट में साइन-अप, एक मिनट में “ऑटो-रिन्यू” की छोटी-सी लाइन, और फिर काम में डूब जाना। नतीजा? ट्रायल खत्म होने की तारीख मेरे कैलेंडर में कहीं नहीं थी—क्योंकि उस पल मेरा दिमाग “समाधान” मोड में था, “भविष्य का मैं” मोड में नहीं। और “भविष्य का मैं” आम तौर पर वही होता है जो रात में थका हुआ होता है, और नोटिफिकेशन पर बस ठीक है दबा देता है।
कुछ समय बाद एक सरप्राइज़ चार्ज आया। वह बहुत बड़ा या बहुत छोटा—कुछ भी हो सकता है, पर भाव एक ही था: यह तो मैंने चुना नहीं था, यह तो हो गया। और यही बात सबसे ज्यादा खलती है—खर्च नहीं, बल्कि नियंत्रण का खिसकना। मैंने उस शाम रद्द किया, झुंझलाहट के साथ, और अपने आप से थोड़ा नाराज़ भी।
अगले हफ्ते दूसरा दृश्य बना, पूरी तरह अलग। इस बार एक स्ट्रीमिंग सर्विस का ट्रायल था—थोड़ा-सा आराम चाहिए था, काम के बीच। मैं जानता/जानती था कि मैं कई बार ट्रायल को “बस चलने देते हैं” तक खिसका देता/देती हूँ। तनाव अब यह नहीं था कि मुझे सेवा चाहिए या नहीं; तनाव यह था कि मैं अपने फैसले को भूल जाने की आदत से कैसे निपटूँ।
यहीं से मेरा सरल बजट नियम पैदा हुआ:
हर फ्री ट्रायल को उसी दिन “पेड खर्च” की तरह जगह दो—या तो बजट में उसकी जगह बनाओ, या उसी दिन रद्द करने की तारीख तय करो।
इस नियम का मतलब “कंजूसी” नहीं है। इसका मतलब है कि ट्रायल को अस्थायी नहीं, निर्णय के इंतज़ार में बैठा खर्च मानना। जब आप इसे ऐसे देखते हैं, तो आपकी हरकतें बदलती हैं:
- मैं ट्रायल शुरू करते ही अपने कैलेंडर में एक रिमाइंडर लगाता/लगाती हूँ—ट्रायल खत्म होने से कुछ दिन पहले, और एक उसी दिन।
- मैं अपने बजट में एक छोटा-सा “सब्सक्रिप्शन स्लॉट” मानकर चलता/चलती हूँ—एक सीमित जगह, जिसमें नई चीज़ आए तो पुरानी चीज़ बाहर जाए।
- और सबसे अहम: मैं खुद से एक सवाल लिखकर रखता/रखती हूँ—क्या यह मेरे मौजूदा महीने को आसान बना रहा है, या सिर्फ भविष्य के महीने पर बोझ रख रहा है?
तीसरा दृश्य तब आया जब मुझे एक डिजाइन ऐप का ट्रायल चाहिए था। इस बार मैंने नियम लागू किया। ऐप खोलने से पहले ही मैंने तय किया: अगर यह अगले कुछ प्रोजेक्ट्स में लगातार उपयोग में आएगा, तभी इसे रहने दूंगा/दूंगी। मैंने ट्रायल के पहले दिन ही “रद्द करने” का बटन ढूंढ लिया—रद्द नहीं किया, बस देखा कि कहाँ है। यह एक अजीब-सी राहत देता है, जैसे आप किसी नए शहर में होटल ढूंढने के साथ-साथ एग्ज़िट भी देख लें। आप उम्मीद करते हैं कि जरूरत नहीं पड़ेगी, पर यह जानना अच्छा लगता है कि आप फँसे नहीं हैं।
ट्रायल के दौरान मैं नोट्स बनाता/बनाती रहा/रही—कोई तकनीकी समीक्षा नहीं, बस अनुभव: क्या मैं इसे खोलने के लिए उत्साहित हूँ? क्या यह मेरे काम को सच में सरल करता है? क्या मैं इसके बिना लौटकर वही काम कर सकता/सकती हूँ?
ट्रायल खत्म होने से पहले वाले दिन रिमाइंडर आया। मैंने शांत दिमाग से देखा: ऐप उपयोगी था, लेकिन मेरी दिनचर्या में इसकी जगह उस तरह नहीं बन रही थी जैसी मैंने सोची थी। मैंने रद्द किया—और इस बार कोई चिढ़ नहीं थी। क्योंकि यह “नुकसान रोकना” नहीं था, यह “फैसला” था।
इस नियम ने मुझे यह भी सिखाया कि कभी-कभी सब्सक्रिप्शन रखना सही है। कुछ चीजें सच में समय बचाती हैं, ऊर्जा बचाती हैं, और काम में गुणवत्ता लाती हैं। मुद्दा यह नहीं कि “कभी खर्च मत करो।” मुद्दा यह है कि खर्च अपने आप न हो।
सीख जो आप अपनाकर देख सकते हैं
- ट्रायल को “याददाश्त” पर मत छोड़िए। रिमाइंडर आपकी इच्छाशक्ति का अपमान नहीं; यह आपके व्यस्त जीवन का सम्मान है।
- एक सीमित “सब्सक्रिप्शन स्लॉट” सोचिए। नई सेवा आए तो किसी पुरानी चीज़ को अलविदा कहने का नियम रखें—निर्णय आसान होता है।
- पहले दिन ही रद्द करने का रास्ता देख लें। इससे आप उपयोगकर्ता बनते हैं, बंधक नहीं।
- ट्रायल के दौरान “भाव” नोट करें। उपयोगिता केवल फीचर्स नहीं; यह आपकी राहत, स्पष्टता, और नियमित इस्तेमाल में दिखती है।
- अचानक शुल्क का दर्द अक्सर नियंत्रण के खोने से होता है। नियम का लक्ष्य पैसा नहीं, नियंत्रण वापस लाना है।
अगर आप इस स्थिति में हैं—कई ट्रायल खुले पड़े हैं, या एक नया ट्रायल शुरू करने वाले हैं—तो आपके पास कुछ सरल विकल्प हैं: आज ही कैलेंडर में दो रिमाइंडर जोड़ दें, एक “सब्सक्रिप्शन स्लॉट” तय कर लें, ट्रायल के पहले दिन ही रद्द करने का विकल्प ढूंढ लें, या खुद को अनुमति दें कि “अभी नहीं” भी एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

