अगर आपकी सैलरी एक महीने भी रुकी, तो क्या आपका प्लान चल पाएगा? बिना वेतन छुट्टी (unpaid leave) लेने का असली खेल “अनुमति” नहीं—“रनवे” है: आपके पास कितने समय तक खर्च चलाने का ईंधन है, बिना कमाई के।
आज मैं आपको एक सरल रनवे प्लान दूँगा—जिसमें कोई भारी-भरकम फाइनेंस भाषा नहीं। बस तीन नंबर, एक अनुपात, और एक साफ़ फैसला।
सबसे पहले: लोग क्या गलत करते हैं
अधिकांश लोग unpaid leave को ऐसे प्लान करते हैं जैसे ट्रिप हो—“चलो देखेंगे”। फिर छुट्टी शुरू होते ही हर छोटा खर्च बड़ा लगने लगता है। समस्या खर्च नहीं है; समस्या है पहले से तय न होना कि कौन से खर्च जरूरी हैं और कौन से आदत वाले।
कुकिंग का उदाहरण लें: अगर गैस खत्म होने वाली है, तो आप पहले दाल-चावल बनाते हैं, केक नहीं। बजट भी ऐसा ही है—ईंधन सीमित हो तो “स्टेपल्स” पहले।
एक याद रखने वाला नियम: आपका रनवे = (ज़रूरी खर्च) × समय
रनवे समझने के लिए आपको बस दो चीज़ें चाहिए:
- आपका “मिनिमम मंथली” खर्च (केवल जरूरी)
- आपके पास मौजूद “कुशन” (बचत/कैश जिसे आप सच में इस्तेमाल करेंगे)
फॉर्मूला सरल है:
रनवे (महीने) = आपका कुशन ÷ आपका मिनिमम मंथली खर्च
यही पूरी पोस्ट का takeaway है। बाकी सब इसे साफ़ बनाने के तरीके हैं।
स्टेप 1: खर्च को 3 बक्सों में बांटिए (10 मिनट का काम)
अपने खर्चों को तीन श्रेणियों में लिखिए:
- नॉन-नेगोशिएबल (काट नहीं सकते)
किराया/होम लोन, बेसिक ग्रॉसरी, दवाइयाँ, न्यूनतम बिल, जरूरी यात्रा - नेगोशिएबल (कम हो सकते हैं)
बाहर का खाना, सब्सक्रिप्शन, कैब बनाम पब्लिक ट्रांसपोर्ट, शॉपिंग, मनोरंजन - डिले-एबल (अभी नहीं)
बड़े गैजेट, अपग्रेड, त्योहार/फंक्शन का बड़ा खर्च, ट्रिप, फर्नीचर
अब सिर्फ बॉक्स #1 का कुल निकालिए। यही आपका मिनिमम मंथली है।
यहाँ एक साधारण अनुपात मदद करता है:
अगर आपका सामान्य महीना 100% खर्च है, तो unpaid leave के दौरान लक्ष्य रखें कि मिनिमम मंथली ~60–70% तक आ जाए। (हर किसी के लिए संभव नहीं, पर दिशा यही है।)
स्टेप 2: कुशन का सच निकालिए (खुद को धोखा मत दीजिए)
कुशन लिखते समय लोग अक्सर “जो पैसा है” और “जो पैसा उपलब्ध है” को एक समझ लेते हैं। कुशन में ये शामिल करें:
- सेविंग/कैश जो बिना पछतावे निकाला जा सके
- अगर कोई तय बोनस/भुगतान पक्का है और समय पर मिलेगा, तभी जोड़ें
- क्रेडिट कार्ड लिमिट को कुशन मत मानिए (वो उधार है, रनवे नहीं)
यह वही जगह है जहाँ “अपने असली नंबर जानना” काम आता है। खर्च ट्रैकिंग का मतलब नियम बनाना नहीं—पहले जमीन देखना है कि आप कहाँ खड़े हैं। (बस इतना ही।)
स्टेप 3: रनवे को 3 लेन में सेट कीजिए
अब तय करें आप किस लेन में हैं:
- ग्रीन लेन: 3+ महीने का रनवे
आराम से unpaid leave प्लान हो सकती है। फिर भी बॉक्स #2 में कटौती से रनवे बढ़ाइए—क्योंकि अनिश्चितता हमेशा रहती है। - येलो लेन: 1–3 महीने का रनवे
छुट्टी संभव है, लेकिन “स्ट्रिक्ट मिनिमम” पर। यहाँ सबसे ज्यादा गलती होती है: लोग पहले महीने ढीले रहते हैं, तीसरे महीने पैनिक। शुरुआत से ही खर्च को कंट्रोल में रखिए। - रेड लेन: 1 महीने से कम
सलाह सीधी है: अभी unpaid leave लेना रिस्की है—जब तक आपके पास कोई वैकल्पिक सपोर्ट न हो। पहले रनवे बनाइए या छुट्टी की अवधि/समय बदलिए।
“सिंपल रनवे प्लान”: 50/30/20 का छोटा ट्विस्ट
कई लोग 50/30/20 जानते हैं। Unpaid leave के लिए इसे अस्थायी रूप से ऐसे सोचिए:
- ~70% = जरूरी खर्च (बॉक्स #1)
- ~20% = “रनवे एक्सटेंशन” (कुशन बढ़ाने/खर्च घटाने के कदम)
- ~10% = छोटी खुशियाँ (ताकि आप टूटें नहीं)
क्यों? क्योंकि छुट्टी के दौरान मानसिक ऊर्जा भी संसाधन है। अगर आप 100% कटौती करेंगे, तो आप 2 हफ्ते में थककर फिर खर्च बढ़ा देंगे—जैसे डाइट में होता है।
अगर ये आपके लिए फिट नहीं बैठता… तो ये विकल्प अपनाइए
यह सलाह situational है। कुछ मामलों में “मिनिमम मंथली” बहुत ऊँचा हो सकता है (जैसे मेडिकल/परिवार की जिम्मेदारी)। ऐसे में:
- समय घटाइए: 8 हफ्ते की जगह 4 हफ्ते
- फॉर्मेट बदलिए: पूरी छुट्टी की जगह 50/50 (आधा समय काम, आधा समय ब्रेक)
- खर्च नहीं, टाइमिंग बदलिए: बड़े भुगतान (बीमा/फीस) को छुट्टी से पहले/बाद में शिफ्ट करें
- सपोर्ट सिस्टम स्पष्ट करें: परिवार/पार्टनर के साथ रोल और जिम्मेदारियाँ पहले तय करें (धुँधले समझौते बाद में तनाव बनते हैं)
निष्कर्ष की जगह एक सीधी बात
Unpaid leave का निर्णय भावनात्मक होता है, लेकिन उसका बजट गणित है। आपको भविष्य नहीं जानना—आपको बस अपना रनवे पता होना चाहिए, जैसे गाड़ी चलाने से पहले आप फ्यूल गेज देखते हैं।
सबसे समझदार कदम यही है: पहले मिनिमम मंथली निकालिए, फिर कुशन से भाग देकर अपना रनवे तय कीजिए।

