क्या है: “ओवरपे” कहाँ होता है?
विदेश पैसे भेजना सुनने में सीधा लगता है—आप राशि डालते हैं, रिसीवर को पैसे मिलते हैं। लेकिन असली खेल अक्सर एक्सचेंज रेट में होता है। कई बार “फीस कम” दिखती है, पर रेट थोड़ा खराब मिलता है, और कुल मिलाकर आपका नुकसान ज़्यादा हो जाता है।
सरल नियम: कुल लागत = फीस + (आपको मिले रेट और असली रेट के बीच का फर्क)।
यही “छुपा खर्च” है जो सबसे आसानी से मिस हो जाता है।
क्यों ध्यान दें: छोटे फर्क भी बड़ा असर करते हैं
स्टूडेंट लाइफ में हर ट्रांसफर बहुत बड़ा नहीं होता—कभी किराया शेयर करना, कभी परिवार को भेजना, कभी दोस्त की मदद। लेकिन अगर आप साल में कई बार भेजते हैं, तो “थोड़ा-थोड़ा” मिलकर बड़ा हो जाता है।
और एक और बात: जब हम जल्दी में होते हैं, हम अक्सर सबसे आसान विकल्प चुन लेते हैं—जो ठीक है। बस इतना करें कि आसान + ठीक-ठाक डील मिल जाए। परफेक्ट बनने की ज़रूरत नहीं।
कैसे करें: फीस नहीं, “प्राप्त राशि” से तुलना करें
जब भी आप दो विकल्प देख रहे हों (बैंक वायर, ऐप/सेवा, कार्ड के ज़रिए, कैश पिकअप), तुलना का सबसे साफ तरीका है:
- आप कितनी राशि भेज रहे हैं (आपके खाते से कटेगी)
- रिसीवर को कितनी राशि मिलेगी (असली तुलना यही है)
- कितने समय में पहुंचेगी
- कौन सा तरीका इस्तेमाल हो रहा है (बैंक ट्रांसफर, कार्ड, वायर)
फीस “0” भी हो सकती है, फिर भी रेट खराब हो सकता है। इसलिए अपने लिए एक छोटी आदत बना लें: एक स्क्रीन पर “रिसीवर को मिलने वाली राशि” देखे बिना कन्फर्म न करें।
उदाहरण: दो विकल्पों को 30 सेकंड में कैसे पकड़ें
मान लीजिए आप एक ही राशि भेज रहे हैं।
- विकल्प A: फीस कम, लेकिन रिसीवर को कम मिल रहा है
- विकल्प B: फीस थोड़ी ज़्यादा, लेकिन रिसीवर को ज़्यादा मिल रहा है
आपको बस यह देखना है: रिसीवर को कितनी रकम मिल रही है?
जो विकल्प समान इनपुट पर ज़्यादा देता है (या समान आउटपुट के लिए कम लेता है), वही बेहतर है—बाकी बातें (स्पीड, सुविधा) आप अपने हिसाब से तय करें।
2–4 मिनी-एक्सपेरिमेंट (जब चाहें, बिना शेड्यूल)
1) “दो-स्क्रीन तुलना” एक्सपेरिमेंट
एक ही समय पर दो सेवाओं/तरीकों में वही राशि डालें और सिर्फ यह लिख लें:
- रिसीवर को मिलने वाली राशि
- अनुमानित समय
फिर चुनें। बस 2 मिनट।
2) “आउटपुट-फर्स्ट” एक्सपेरिमेंट
इस बार भेजने से पहले तय करें: रिसीवर को ठीक-ठीक कितनी राशि मिलनी चाहिए।
फिर अलग-अलग विकल्पों में देखें कि उस आउटपुट के लिए आपसे कितनी राशि कट रही है। कई बार यही तरीका ज़्यादा पैसे बचाता है।
3) “धीमा लेकिन सस्ता” एक्सपेरिमेंट
अगर मामला इमरजेंसी नहीं है, तो एक बार धीमी स्पीड वाला विकल्प चुनकर देखें।
कई सेवाएँ “फास्ट” के लिए ज्यादा चार्ज करती हैं। आपको अपने लिए बस यह जानना है: “मैं कितनी देर इंतज़ार कर सकता/सकती हूँ?”
4) “रसीद-लॉग” एक्सपेरिमेंट
हर ट्रांसफर के बाद 20 सेकंड में नोट करें: भेजी गई राशि, रिसीवर को मिली राशि, कुल कटौती।
3–4 ट्रांसफर में आपको साफ दिखेगा कि कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे “फेयर” है।
Try this in 10 minutes: आपका “फीस-चेक” रूटीन
- आज/अभी एक काल्पनिक ट्रांसफर बनाइए (कन्फर्म मत कीजिए)
- दो अलग विकल्पों में वही राशि डालिए
- हर विकल्प में यह तीन चीजें देखें:
- रिसीवर को मिलने वाली राशि
- कुल कटौती/फीस
- समय
- जिस विकल्प में रिसीवर को बेहतर आउटपुट मिलता है (और समय आपके लिए ठीक है), उसे “डिफ़ॉल्ट” मान लें
- उसी का नाम/नोट अपने फोन में सेव कर लें
यह छोटी आदत आगे के कई ट्रांसफर आसान कर देती है।
कौन-कौन से “चार्ज” अक्सर छुपकर आते हैं (सिंपल लिस्ट)
- एक्सचेंज रेट मार्जिन: रेट में थोड़ा फर्क, पर असर बड़ा
- इंटरमीडियरी बैंक फीस (कभी-कभी वायर में): रास्ते में कट सकता है
- कार्ड पेमेंट फीस: कार्ड से फंड करने पर अतिरिक्त चार्ज
- रिसीवर-साइड फीस: रिसीवर के बैंक/कैश-आउट पर कटौती
- राउंडिंग/मिनिमम फीस: छोटी राशि पर अपेक्षाकृत ज्यादा लगता है
आपको हर चीज़ पर कंट्रोल नहीं मिलेगा—लेकिन देख लेना भी आधा काम है।
कॉपी-पेस्ट टेम्पलेट: “ट्रांसफर तुलना” नोट
नीचे वाला टेम्पलेट नोट्स ऐप में रखें। अगली बार बस भर दें:
ट्रांसफर लक्ष्य:
- रिसीवर देश/करेंसी:
- रिसीवर को चाहिए (अगर फिक्स है):
- मैं भेज रहा/रही हूँ:
विकल्प 1:
- तरीका (बैंक/ऐप/वायर/कार्ड):
- अनुमानित समय:
- फीस:
- एक्सचेंज रेट (जैसा दिखे):
- रिसीवर को मिलेगा:
- कुल कटौती (मेरे खाते से):
विकल्प 2:
- तरीका (बैंक/ऐप/वायर/कार्ड):
- अनुमानित समय:
- फीस:
- एक्सचेंज रेट (जैसा दिखे):
- रिसीवर को मिलेगा:
- कुल कटौती (मेरे खाते से):
निर्णय:
- मैं चुन रहा/रही हूँ:
- कारण (1 लाइन):
आख़िरी बात (बिना प्रेशर)
आपको हर बार “सबसे सस्ता” नहीं ढूँढना है। बस इतना करें कि फीस के साथ-साथ रेट भी देखें, और तुलना “रिसीवर को मिलने वाली राशि” से करें। यह छोटा कदम आपकी मेहनत और पैसे—दोनों का सम्मान करता है।

