जॉइंट बैंक अकाउंट के बिना बिलों को कैसे साझा करें

Author Bao

Bao

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जॉइंट बैंक अकाउंट खोलना कई बार जटिल और अनावश्यक लगता है। वित्तीय स्वतंत्रता बनाए रखते हुए खर्चों को साझा करने का सबसे सरल और निष्पक्ष तरीका है: द प्रोपोर्शनल पॉकेट नियम (The Proportional Pocket Rule)

नियम सीधा है: अपने साझा बिलों को अपनी व्यक्तिगत आय के अनुपात (Percentage) में बांटें, न कि बराबर राशि में।

यह नियम क्यों काम करता है?

जब दो लोग अलग-अलग कमाते हैं, तो खर्चों को 50/50 बांटना कम कमाने वाले व्यक्ति पर भारी पड़ सकता है। यह नियम सुनिश्चित करता है कि दोनों साथी अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे रहे हैं और किसी एक पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। इसके लिए आपको अपना बैंक अकाउंट बदलने की जरूरत नहीं है, बस एक साझा गणना की जरूरत है।

सामान्य गलतियां

  • हर छोटी चीज का हिसाब रखना: चाय या स्नैक्स जैसे छोटे खर्चों के लिए ऐप पर हिसाब रखना मानसिक थकान पैदा करता है। केवल बड़े और निश्चित बिलों पर ध्यान दें।
  • बफर न रखना: बिलों की राशि हर महीने बदल सकती है। हमेशा तय राशि से 5-10% अधिक का योगदान दें ताकि अचानक आए खर्चों को संभाला जा सके।
  • अघोषित कर्ज: अगर एक साथी भुगतान करना भूल जाता है, तो उसे तुरंत ट्रैक न करना भविष्य में तनाव पैदा करता है।

जब नियम विफल होता है (और सुरक्षित विकल्प)

यह नियम तब विफल हो जाता है जब आय में अंतर बहुत अधिक हो (जैसे एक साथी दूसरे से 4 गुना ज्यादा कमाता हो)। ऐसी स्थिति में, कम कमाने वाले साथी के पास अपनी बचत के लिए कुछ नहीं बचता।

साफर वर्जन (The Floor Rule): एक न्यूनतम सीमा (Threshold) तय करें। कम कमाने वाला साथी अपनी आय का अधिकतम 30% से अधिक साझा खर्चों में नहीं देगा, चाहे अनुपात कुछ भी कहे। बाकी का हिस्सा अधिक कमाने वाला साथी कवर करेगा।

पॉकेट-कार्ड: प्रोपोर्शनल पॉकेट नियम

  • नियम: कुल आय में अपने हिस्से के प्रतिशत (%) के बराबर बिल चुकाएं।
  • कब उपयोग करें: जब आप अपनी व्यक्तिगत बचत और बैंक अकाउंट अलग रखना चाहते हैं।
  • कब न करें: जब एक साथी की आय दूसरे के मुकाबले नगण्य हो।
  • कैसे अपनाएं: केवल किराया, बिजली और इंटरनेट जैसे 'फिक्स्ड' खर्चों के लिए इसे लागू करें।

वास्तविक परिदृश्य

परिदृश्य 1: समान भागीदारी दो साथी बराबर कमाते हैं (50% - 50% अनुपात)। वे अपने सभी साझा बिलों को आधा-आधा बांटते हैं। यह सबसे सरल स्थिति है।

परिदृश्य 2: आय में अंतर साथी A कुल घरेलू आय का 70% कमाता है और साथी B 30%। अगर महीने के साझा खर्चों को 100 इकाइयों के रूप में देखा जाए, तो साथी A 70 इकाइयों का भुगतान करेगा और साथी B 30 इकाइयों का। इससे दोनों के पास अपनी व्यक्तिगत बचत के लिए उनकी आय के अनुपात में पैसा बचेगा।

परिदृश्य 3: आय में बदलाव यदि साथी B की आय बढ़ती है और अब वह कुल आय का 40% कमा रहा है, तो योगदान का अनुपात तुरंत 60/40 में बदल जाता है। यह सिस्टम लचीला है और बिना किसी नए अकाउंट के तुरंत अपडेट हो जाता है।

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