सीधा जवाब यह है कि जितने दिन जो व्यक्ति घर में रहा, उतने दिन का हिस्सा वही दे। इसे "प्रो-रेटा" यानी अनुपात के हिसाब से बंटवारा कहते हैं। किराया, बिजली, पानी, इंटरनेट जैसे खर्चों को दिनों के हिसाब से बांटना सबसे साफ और निष्पक्ष तरीका माना जाता है।
घर में पहले से ही कपड़े, बर्तन और हर किसी का अपना शेड्यूल होता है। ऊपर से किसी का बीच महीने में शिफ्ट होना थोड़ी उलझन तो लाता ही है। अच्छी बात यह है कि थोड़े से हिसाब से यह काम बिना किसी बहस के हो सकता है।
सबसे पहले तारीख पक्की करें
बंटवारे की शुरुआत एक साफ तारीख से होती है।
- जाने वाला रूममेट किस दिन आखिरी बार घर में रहेगा?
- नया रूममेट (अगर कोई आ रहा है) किस दिन से रहना शुरू करेगा?
- क्या जाने और आने के बीच कुछ दिन कमरा खाली रहेगा?
यह भी तय कर लें कि "रहना" किसे मानेंगे: चाबी लौटाने का दिन, सामान निकलने का दिन, या आखिरी रात। एक बार तारीख लिखित में तय हो जाए, तो आधी उलझन वहीं खत्म हो जाती है।
दिनों के हिसाब से किराया कैसे निकालें
तरीका आसान है:
- उस महीने के कुल दिन गिनें (28, 29, 30 या 31)।
- व्यक्ति के हिस्से के किराए को कुल दिनों से भाग दें। इससे एक दिन का किराया निकलेगा।
- उस एक दिन के किराए को उन दिनों से गुणा करें, जितने दिन वह व्यक्ति रहा।
काल्पनिक उदाहरण: मान लीजिए दो रूममेट मिलकर ₹20,000 किराया देते हैं, यानी हर किसी का हिस्सा ₹10,000 है। महीना 30 दिन का है और एक रूममेट 12 तारीख तक रहकर चला जाता है।
- एक दिन का हिस्सा: ₹10,000 ÷ 30 = लगभग ₹333
- 12 दिन का हिस्सा: ₹333 × 12 = लगभग ₹4,000
बाकी 18 दिन का हिस्सा (लगभग ₹6,000) या तो नया रूममेट देगा, या अगर कोई नहीं आया तो वह हिस्सा किसके जिम्मे होगा, यह पहले से तय करना जरूरी है।
बिजली, पानी और इंटरनेट का बंटवारा
हर खर्च एक जैसा नहीं होता, इसलिए इन्हें अलग-अलग देखें।
तय मासिक खर्च
इंटरनेट, मेंटेनेंस या किसी सब्सक्रिप्शन जैसे खर्च हर महीने लगभग एक जैसे रहते हैं। इन्हें भी किराए की तरह दिनों के हिसाब से बांटना सबसे आसान है।
इस्तेमाल पर आधारित खर्च
बिजली और पानी जैसे बिल इस्तेमाल पर निर्भर करते हैं। इनके लिए तीन विकल्प हैं:
- दिनों के हिसाब से: कुल बिल को दिनों के अनुपात में बांट दें। सबसे आसान तरीका।
- मीटर रीडिंग से: जाने वाले दिन मीटर की फोटो ले लें। उस रीडिंग तक का खर्च पुराने रूममेट का, उसके बाद का नए रूममेट का।
- अनुमान से: अगर किसी ने गर्मी में लगातार AC चलाया या कोई ज्यादातर समय घर से बाहर रहा, तो आपसी सहमति से थोड़ा बदलाव कर सकते हैं।
मीटर की फोटो लेना सबसे छोटा काम है, पर बाद में सबसे ज्यादा झंझट बचाता है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट का क्या करें
अगर जाने वाले रूममेट ने डिपॉजिट में हिस्सा दिया था, तो कुछ बातें आपस में साफ कर लें:
- क्या नया रूममेट उसका हिस्सा सीधे उसे लौटाएगा?
- कमरे में कोई नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई कैसे होगी?
- डिपॉजिट पर मकान-मालिक के साथ जो भी शर्तें तय हैं, उन्हें अपने किराया समझौते में पढ़ लें।
डिपॉजिट के नियम हर समझौते और जगह के हिसाब से अलग हो सकते हैं, इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले अपने एग्रीमेंट को जरूर देख लें।
साझा घरेलू सामान और छोटे खर्च
किराने का सामान, सफाई का सामान, गैस सिलेंडर जैसी चीजें अक्सर भूल जाती हैं। इनके लिए:
- जाने से पहले एक छोटी सूची बनाएं कि साथ में क्या खरीदा गया था।
- जो सामान घर में रह रहा है, उसके लिए जाने वाले को थोड़ा हिस्सा लौटाना है या नहीं, यह तय कर लें।
- बहुत छोटे खर्चों पर मिनट-मिनट का हिसाब करने की जगह, एक गोल रकम पर सहमत हो जाना अक्सर रिश्ते के लिए बेहतर रहता है।
झगड़े से बचने के आसान तरीके
- सब कुछ लिखें: तारीखें, रकम और जो भी तय हुआ, एक मैसेज या नोट में सबके सामने रख दें।
- बिल की कॉपी साझा करें: जब असली बिल आए, तो उसकी फोटो सबको भेज दें।
- पहले से बात करें: शिफ्टिंग के आखिरी दिन हिसाब करने की जगह एक-दो हफ्ते पहले बात शुरू कर दें।
- बाद में आने वाले बिल का ध्यान रखें: कई बिल महीने के बाद आते हैं। जाने वाले रूममेट से पहले ही तय कर लें कि वह अपना हिस्सा कब और कैसे देगा।
- शांत रहें: कुछ सौ रुपये के फर्क पर लंबी बहस शायद ही किसी के काम आती है।
अगर कमरा खाली रह जाए
यह सबसे मुश्किल स्थिति होती है। अगर जाने वाले रूममेट के बाद कोई नहीं आता, तो खाली दिनों का किराया कौन देगा, यह इस पर निर्भर करता है कि आप सबके बीच और मकान-मालिक के साथ क्या तय हुआ था। कुछ घरों में जाने वाला व्यक्ति नोटिस पीरियड तक का हिस्सा देता है, कुछ में बचे हुए लोग मिलकर देते हैं। कोई एक सही जवाब नहीं है, इसलिए यह बात रूममेट बनने के समय ही तय कर लेना सबसे समझदारी है।
एक नज़र में
| खर्च | बंटवारे का आसान तरीका |
|---|---|
| किराया | रहने के दिनों के हिसाब से |
| इंटरनेट/तय खर्च | रहने के दिनों के हिसाब से |
| बिजली/पानी | मीटर रीडिंग या दिनों के हिसाब से |
| डिपॉजिट | एग्रीमेंट और आपसी सहमति से |
| साझा सामान | सूची बनाकर, गोल रकम पर सहमति |
बीच महीने में रूममेट का जाना थोड़ा बिखराव लाता है, लेकिन सही तारीख, सीधा हिसाब और साफ बातचीत इसे आसान बना देते हैं। दिनों के हिसाब से बांटें, सब कुछ लिखकर रखें और छोटे फर्कों को दिल पर न लें।

