वो पल जब आप “बस दूध और सब्ज़ी” लेने जाते हो… और बिल देखते ही अंदर से कुछ बैठ-सा जाता है—अगर ये तुम्हारे साथ होता है, तो तुम अकेले नहीं हो। आज मैं तुम्हें एक छोटा सा नियम देने वाली हूँ: 3-आइटम रूल। इससे तुम्हारी खरीदारी पर ब्रेक लगेगा, बिना तुम्हें खुद से लड़ने की ज़रूरत पड़ेगी।
3-आइटम रूल क्या है?
हर बार जब तुम अपनी लिस्ट के बाहर कुछ लेने लगो, तो खुद से कहो: “मैं सिर्फ़ 3 अतिरिक्त आइटम ही ले सकती/सकता हूँ।” बस।
ना “सब बंद”, ना “सब छूट।” बस एक नरम-सा लिमिट, जो दिमाग को शांत करती है और हाथ को धीमा।
क्योंकि सच ये है—इम्पल्स बाय अक्सर “लालच” नहीं होता। वो थकान होती है। वो खुद को थोड़ी राहत देने की कोशिश होती है। वो वो दिन होता है जब बैंक ऐप खोलने का मन भी नहीं करता, और स्टोर की रोशनी में बस कुछ “अच्छा” लग जाता है। मैंने भी किया है—कभी-कभी तो बस इसलिए कुछ उठा लिया क्योंकि उस दिन खुद को संभालना भारी लग रहा था।
ये नियम काम क्यों करता है (और क्यों तुम फेल नहीं हो)
जब तुम खुद पर “कुछ भी नहीं लेना” थोपती हो, दिमाग उसे चुनौती मान लेता है। फिर हर चीज़ अचानक ज्यादा जरूरी लगने लगती है। और जैसे ही एक “गलत” आइटम कार्ट में गया, दिमाग कहता है—चलो, अब तो सब बिगड़ गया। यही वो फिसलन है।
3-आइटम रूल इस फिसलन को रोकता है, क्योंकि:
- तुम्हें परफेक्ट नहीं बनना पड़ता
- तुम्हारे पास चॉइस रहती है
- “सब या कुछ नहीं” वाली सोच टूटती है
और सबसे बड़ा फायदा? तुम्हारे अंदर वाली बेचैनी कम होती है, क्योंकि अब गेम के नियम साफ हैं।
3-आइटम रूल को कैसे इस्तेमाल करना है (बिल्कुल आसान)
स्टोर में घुसने से पहले, अपने मन में या नोट्स में बस इतना तय कर लो:
आज मैं लिस्ट के बाहर सिर्फ़ 3 चीज़ें ले सकती/सकता हूँ।
अब स्टोर में:
- हर “अरे ये भी ले लेते हैं” पर एक पॉइंट खर्च करो
वो चिप्स हो, नई चटनी हो, या कोई “बस ट्राय करने” वाली चीज़—सब उसी 3 में गिने जाएंगे। - तीन पूरे हो गए? फिर ‘रिप्लेस’ का नियम
अगर चौथी चीज़ बहुत ही चाहिए लग रही है, तो उसे लेने के लिए पहले तीन में से एक को वापस रखना होगा।
ये जादू जैसा लगता है, क्योंकि अचानक दिमाग सच में सोचने लगता है: “मुझे क्या ज्यादा चाहिए?” - “आज का मूड” वाला एक स्लॉट रखो
कई बार इम्पल्स बाय भावनात्मक होता है। तो 3 में से 1 आइटम सिर्फ़ ‘दिल को अच्छा लगे’ के लिए रहने दो।
ये तुम्हें इंसान बने रहने की अनुमति देता है, रोबोट नहीं बनाता।
असली जिंदगी का उदाहरण (क्योंकि यही सच है)
मान लो तुमने लिस्ट के बाहर तीन चीज़ें देखीं:
- कोई मीठा जो “आज के दिन” के लिए चाहिए
- एक स्नैक “काम के बीच” के लिए
- एक नया सॉस “ट्राय” करने के लिए
तीन हो गए। अब तुम एक और चीज़ देखते हो—कुछ ऐसा जो सच में उपयोगी लग रहा है।
यहाँ तुम बस इतना करोगे: “ठीक है, अगर ये लेना है तो ऊपर की तीन में से कौन-सी मैं वापस रख सकती हूँ?”
और कई बार जवाब तुरंत आ जाता है।
कभी-कभी नहीं भी आता—तो तुम रुकती हो, सांस लेती हो, और खुद से नरमी से कहती हो: “मैं सही कर रही हूँ। मैं कोशिश कर रही हूँ।”
वो दो मिनट जो सबसे ज्यादा पैसे बचाते हैं
इम्पल्स बाय अक्सर तेज़ी में होती है। इसलिए एक छोटा ब्रेक बहुत काम करता है।
जब भी तुम लिस्ट के बाहर कुछ उठाओ, ये लाइन ट्राय करो:
- “क्या ये मेरे अगले कुछ दिनों को आसान करेगा, या बस अभी का स्ट्रेस कम करेगा?”
अगर जवाब “बस अभी” है, तो वो गलत नहीं है—बस उसे 3 में से मूड स्लॉट में डालो।
और अगर वो “अगले दिनों को आसान” करता है, तो शायद वो सच में काम का है।
ट्रैकिंग से अपराधबोध नहीं, राहत मिलती है
एक और चीज़ जिसने मेरी एंग्जायटी कम की—खर्च को डर के बिना देख पाना। जब मैं बैंक ऐप खोलने से बचती थी, तब खर्च और भी धुंधला लगता था, और धुंधला मतलब ज्यादा डर।
अगर तुम्हें मदद मिले, तो बस इतना करो:
खरीदारी के बाद इम्पल्स वाली 3 चीज़ों को एक छोटा-सा टैग दे दो—“लिस्ट के बाहर”।
कुछ लोग ये काम किसी ऐप में करते हैं (मेरे लिए ये “एक कम चीज़ सोचने” जैसा था), और कुछ लोग नोट्स में लिख लेते हैं। उद्देश्य बस इतना है: खुद को डांटना नहीं, पैटर्न देखना।
और जब पैटर्न दिखता है—जैसे “मैं थकान में मीठा उठा लेती हूँ” या “काम के बाद स्नैक बढ़ जाता है”—तो तुम खुद को समझने लगती हो। यही असली कंट्रोल है, सज़ा नहीं।
अगर तुम बीच में फिसल जाओ तो?
मान लो 3 से ज्यादा हो गया। या तुमने ध्यान ही नहीं दिया।
प्लीज़ खुद को उस आवाज़ में मत बोलो जिसमें तुम किसी दोस्त से कभी नहीं बोलती।
बस इतना करो:
- अगली बार स्टोर में घुसते ही फिर से नियम सेट कर लो
- और आज के लिए खुद से कहो: “ठीक है। मैं सीख रही हूँ।”
क्योंकि तुम्हारा लक्ष्य परफेक्ट कार्ट नहीं है।
तुम्हारा लक्ष्य वो भारीपन कम करना है—वो “मैं क्यों नहीं संभल पाती” वाला बोझ।
Start here if this feels hard: अगली खरीदारी में बस इतना तय करो—लिस्ट के बाहर सिर्फ़ 3 आइटम।

