सेल के ईमेल से होने वाला अनियोजित खर्च रोकने के लिए तीन चीजें करें: प्रचार वाले ईमेल कम करें, ईमेल देखते ही खरीदारी न करें और हर खरीद को अपनी जरूरत व बजट से मिलाएं। छूट खरीदने की वजह नहीं, पहले से तय खरीद पर विचार करने की एक जानकारी होनी चाहिए।
सेल के ईमेल हमेशा बेकार नहीं होते। किसी जरूरी चीज की खरीद पहले से तय हो, तो वे उपयोगी हो सकते हैं। मुश्किल तब होती है जब ऑफर देखकर ऐसी चीज जरूरत लगने लगे जिसे खरीदने का पहले कोई इरादा नहीं था।
इनबॉक्स में खरीदारी के संकेत कम करें
हर ईमेल देखकर खुद को रोकने के बजाय ऐसे ईमेल की संख्या घटाना एक व्यावहारिक शुरुआत है।
- गैरजरूरी प्रचार ईमेल से सदस्यता हटाएं। जिन दुकानों से खरीदने की कोई तय जरूरत नहीं है, उनके ऑफर नियमित रूप से देखने का लाभ कम है।
- उपयोगी ऑफर अलग फ़ोल्डर में रखें। अगर आपकी ईमेल सेवा में फ़िल्टर की सुविधा है, तो प्रचार वाले संदेश मुख्य इनबॉक्स से अलग किए जा सकते हैं।
- प्रचार ईमेल की सूचनाएं बंद रखें। जरूरी काम के बीच सेल का संदेश दिखने पर खरीदारी की ओर ध्यान जा सकता है।
- ऑर्डर से जुड़े संदेश अलग रखें। रसीद, डिलीवरी और खाते से जुड़ी सूचना को प्रचार ईमेल समझकर न हटाएं।
अनजान या संदिग्ध संदेश में दिए गए लिंक खोलने के बजाय ईमेल सेवा के स्पैम विकल्प का इस्तेमाल करें।
ईमेल पढ़ने और खरीदने के बीच विराम रखें
ईमेल खोलते ही खरीद पूरी करने के बजाय वस्तु का नाम अपनी इच्छा-सूची में लिखें और खरीदारी का पेज बंद कर दें। फिर किसी अलग समय पर उस पर विचार करें—मसलन, अगले दिन या बजट की अगली समीक्षा के दौरान।
यह विराम कोई गारंटी नहीं है, लेकिन इससे ऑफर के उत्साह से अलग होकर फैसला करने का मौका मिलता है। महंगी या गैरजरूरी खरीद के लिए अधिक समय रखना समझदारी हो सकती है।
अगर इस बीच ऑफर खत्म हो जाए, तो इसे नुकसान मानना जरूरी नहीं। जिस चीज की जरूरत तय नहीं थी, उसे न खरीदना बचत का मौका खोना नहीं है।
खरीदने से पहले चार सवाल पूछें
1. क्या ईमेल आने से पहले भी इसकी जरूरत थी?
पहले से लिखी खरीदारी की सूची देखें। उसमें वस्तु नहीं थी, तो कारण स्पष्ट करें: क्या कोई नई जरूरत सामने आई है, या केवल छूट आकर्षक लगी है?
नई जरूरत वास्तविक भी हो सकती है। उसे तुरंत खारिज करने के बजाय जांचना बेहतर है।
2. क्या आपके पास इसी काम की चीज पहले से है?
नई वस्तु का उपयोग सोचें। वह किसी कमी को पूरा करेगी, खराब वस्तु की जगह लेगी या घर में वैसी ही एक और चीज जोड़ देगी?
3. क्या यह आपके उपलब्ध बजट में आती है?
कुल खर्च देखें, केवल दिखाई गई छूट नहीं। जरूरी खर्चों और तय बचत के बाद खरीद के लिए रखी राशि से इसे मिलाएं।
अगर इसके लिए किसी अधिक जरूरी खर्च की राशि लेनी पड़े, तो खरीद टालना बेहतर है।
4. क्या छूट न होती, तब भी आप इसे खरीदने पर विचार करते?
इस सवाल का मतलब यह नहीं कि हर चीज बिना छूट खरीदी जानी चाहिए। मकसद यह समझना है कि दिलचस्पी वस्तु में है या सिर्फ ऑफर में।
ऑफर की शर्तों को अपनी जरूरत से अलग रखें
“आखिरी मौका”, “सिर्फ आपके लिए” या उलटी गिनती जैसे संदेश जल्दी निर्णय लेने की ओर धकेल सकते हैं। समय सीमा होना अपने आप में खरीद को जरूरी नहीं बनाता।
इसी तरह, किसी ऑफर की शर्त पूरी करने के लिए कार्ट में अतिरिक्त सामान जोड़ने से पहले देखें कि वह सामान वास्तव में चाहिए या नहीं। ऑफर का लाभ और आपका कुल खर्च दो अलग बातें हैं।
काल्पनिक उदाहरण: आपने एक जरूरी वस्तु खरीदने की योजना बनाई है। ईमेल में अतिरिक्त सामान लेने पर ऑफर मिलता है। यदि अतिरिक्त सामान का कोई तय उपयोग नहीं है, तो सिर्फ नियोजित वस्तु लेना आपके बजट के अधिक अनुकूल हो सकता है।
पसंद की चीजों के लिए भी बजट में जगह रखें
हर गैरजरूरी खरीद गलत नहीं होती। शौक और आनंद के लिए खरीदारी भी बजट का हिस्सा हो सकती है। समस्या पसंद की चीज खरीदना नहीं, बल्कि उसके खर्च पर बिना विचार किए फैसला लेना है।
अपने बजट में ऐसी खरीद के लिए अलग राशि तय करें। इससे फैसला स्पष्ट रहता है: क्या यह वस्तु उस राशि का अच्छा उपयोग है, या आप उसे किसी दूसरी पसंद के लिए रखना चाहेंगे?
खरीदारी हो जाए तो वजह समझें
अनियोजित खरीद के बाद खुद को दोष देने के बजाय यह पहचानें कि निर्णय कहां बदला:
- ईमेल की सूचना देखते ही खरीदारी का पेज खोल दिया?
- समय सीमा देखकर जरूरत की जांच छोड़ दी?
- अतिरिक्त ऑफर के लिए कार्ट बढ़ा दिया?
- बजट देखे बिना खरीद पूरी कर दी?
फिर उसी बिंदु पर छोटा बदलाव करें। जैसे, सूचनाएं बंद करना, खरीदारी की सूची पास रखना या भुगतान से पहले बजट देखना।
सेल का ईमेल आपके लिए सूचना हो सकता है; खरीदारी की योजना आपकी जरूरत, प्राथमिकताओं और उपलब्ध बजट से बनती है। इन दोनों के बीच थोड़ा समय और एक स्पष्ट जांच रखना सोच-समझकर खर्च करने का व्यावहारिक आधार है।

