बीमा डिडक्टिबल फंड के लिए मेरा एक नियम याद रखिए: अपनी “सबसे बड़ी डिडक्टिबल” का 100% अलग रखो—अलग खाते/पॉकेट में।
यह पोस्ट शिक्षा के लिए है—व्यक्तिगत वित्तीय सलाह नहीं।
डिडक्टिबल फंड आखिर है क्या?
डिडक्टिबल वह हिस्सा है जो किसी क्लेम के समय पहले आपको खुद देना पड़ सकता है। डिडक्टिबल फंड का मतलब है: इतनी बचत जो क्लेम वाले महीने में आपकी जेब न हिले।
यह “इमरजेंसी फंड” का छोटा, स्पष्ट हिस्सा है—सिर्फ डिडक्टिबल को कवर करने के लिए।
नियम-ए-अंगूठा (Rule-of-thumb)
Rule: “Largest Deductible = 100% Saved.”
मतलब: जिन पॉलिसियों/कवरेज में से एक समय में सबसे बड़ा डिडक्टिबल लगने की संभावना है, उसका कम से कम 100% आप तुरंत उपलब्ध बचत में रखें।
क्यों यह डिफ़ॉल्ट अच्छा है:
- सरल है: एक संख्या, एक लक्ष्य।
- तेज़ है: आप “कितना” पर फंसते नहीं।
- व्यवहारिक है: डिडक्टिबल का मकसद ही “पहले भुगतान” है—तो उसे पहले से तैयार रखो।
यह नियम कहाँ टूटता है (Where it fails)
यह नियम तब कमजोर पड़ता है जब एक से ज़्यादा डिडक्टिबल एक साथ पड़ सकते हैं, या भुगतान क्षमता का दबाव बढ़ जाता है:
- मल्टी-क्लेम रिस्क: जैसे स्वास्थ्य + कार दोनों एक ही अवधि में क्लेम हो जाएँ।
- हाई-डिडक्टिबल + लो बफर: आपकी नियमित आय का बफर कम है, और डिडक्टिबल आपकी पे-साइकिल क्षमता का बड़ा हिस्सा खा सकता है।
- को-इंश्योरेंस/आउट-ऑफ-पॉकेट भी भारी: सिर्फ डिडक्टिबल नहीं, उसके बाद भी आपका हिस्सा प्रतिशत में बढ़ सकता है।
सुरक्षित संस्करण (Safer variant)
अगर ऊपर वाले रिस्क दिखते हैं, तो “सेफ” नियम अपनाइए:
Safer Rule: “Largest Deductible का 100% + दूसरे सबसे बड़े का 50%।”
यह आपको दो-इवेंट झटकों के लिए बेहतर तैयार करता है, बिना जरूरत से ज़्यादा जमा करने के।
और अगर आपका कैशफ्लो बहुत टाइट है:
- कम से कम 50% से शुरू करें, लेकिन लक्ष्य 100% रखें।
- एक और सरल थ्रेशहोल्ड: कम से कम 2 पे-साइकिल में बाकी 50% तक पहुँचने की योजना (कितना % बचाना है, वह आपकी स्थिति पर निर्भर है)।
Pocket-Card (याद रखने के लिए)
Rule: Largest Deductible = 100% Saved
When to use: एक समय में एक बड़ा क्लेम होने की संभावना, कैशफ्लो ठीक, और अन्य हिस्से (जैसे को-इंश्योरेंस) सीमित
When not to: एक साथ 2 क्लेम संभव, डिडक्टिबल बहुत बड़ा अनुपात, या भुगतान के बाद भी आपका हिस्सा प्रतिशत में भारी
How to adapt: 100% + दूसरे सबसे बड़े का 50%; या पहले 50% बनाकर 2 पे-साइकिल में 100% तक
2–3 मिनी-सीनारियो (सिर्फ प्रतिशत और वेरिएबल्स)
Scenario 1: सिंपल केस (एक मुख्य जोखिम)
मान लीजिए:
- स्वास्थ्य डिडक्टिबल = H
- कार डिडक्टिबल = A
और संभावना है कि एक समय में एक ही क्लेम होगा।
अगर H > A, तो आपका लक्ष्य: 100% of H।
यदि आपके पास अभी 60% of H है, तो गैप = 40% of H।
आप इसे अपने मासिक/पे-साइकिल बचत प्रतिशत से भरते हैं—बस लक्ष्य स्पष्ट है।
Scenario 2: दो क्लेम का यथार्थ जोखिम
मान लीजिए:
- Largest = L
- Second-largest = S
और पिछले अनुभव/परिस्थितियों से लगता है कि दो अलग क्लेम एक साथ भी हो सकते हैं।
सुरक्षित लक्ष्य: 100% of L + 50% of S।
यह “मैं दो तरफ से फँस गया” वाले महीने को काफी हद तक नरम कर देता है।
Scenario 3: डिडक्टिबल आपकी आय क्षमता पर भारी है
मान लीजिए:
- Largest deductible = L
- आपकी एक पे-साइकिल की टेक-इनकम = P
अगर L > 50% of P, तो यह संकेत है कि सिर्फ “100% of L” भी मनोवैज्ञानिक/नकदी दबाव बढ़ाएगा।
ऐसे में: - पहले 50% of L तुरंत बनाइए
- फिर अगले 2 पे-साइकिल में शेष 50% of L की ओर बढ़िए
यह थ्रेशहोल्ड आपको “क्लेम आया तो क्या होगा” की घबराहट से बचाता है।
कॉमन मिस्टेक्स (Common mistakes)
- डिडक्टिबल को इमरजेंसी फंड में मिलाना: नतीजा—क्लेम के समय पैसा “कहीं और” खर्च हो चुका होता है।
- सब पॉलिसियों के डिडक्टिबल जोड़ देना: अक्सर जरूरत “सम” नहीं होती; जरूरत “सबसे बड़ा, और कभी-कभी दूसरा” होती है।
- सिर्फ न्यूनतम लक्ष्य पर रुक जाना: 50% अच्छा स्टार्ट है, लेकिन 100% असली सुरक्षा है।
- उपलब्धता भूल जाना: लक्ष्य पूरा हो, पर पैसा ऐसा हो जिसे तुरंत निकाला न जा सके—तो काम नहीं करेगा।
- डिडक्टिबल के बाद के हिस्से को अनदेखा करना: कुछ स्थितियों में आपका भुगतान प्रतिशत में आगे भी चल सकता है; तब सेफ नियम बेहतर है।
एक आखिरी सरल तरीका
अगर आपको बस एक लाइन याद रखनी है:
“सबसे बड़ा डिडक्टिबल—पूरे 100% तक अलग रखो; दो-झटके का जोखिम हो तो दूसरे सबसे बड़े का 50% भी जोड़ो।”

