प्रति-उपयोग कीमत नियम: क्या यह खरीद वाकई सही है?

Author Lina

Lina

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यह नियम क्या है (What)

प्रति-उपयोग कीमत का मतलब है:
आप किसी चीज़ पर जितना खर्च कर रहे/रही हैं, उसे आप अनुमानित कितनी बार इस्तेमाल करेंगे—उन उपयोगों से भाग देना।

सूत्र (बहुत सरल):
प्रति-उपयोग कीमत = कुल कीमत ÷ अनुमानित उपयोगों की संख्या

यह कोई “परफेक्ट” गणित नहीं है। यह बस एक छोटा-सा सवाल है जो खरीद को थोड़ा धीमा करता है:
“मैं इसे सच में कितनी बार इस्तेमाल करूँगा/करूँगी?”


यह क्यों मदद करता है (Why)

1) आवेग (impulse) कम करता है

अगर आप किसी चीज़ को 3–4 बार ही इस्तेमाल करने वाले/वाली हैं, तो अचानक उसकी कीमत “भारी” लगने लगती है—और फैसला साफ हो जाता है।

2) गिल्ट के बिना सच दिखाता है

कभी-कभी खरीद सही होती है, बस आपको उसे “यूज़” करना होता है। यह नियम आपको डांटता नहीं—बस अवेयर करता है।

3) “सस्ता बनाम महंगा” को “यूज़फुल बनाम धूल” में बदल देता है

बहुत बार “सस्ता” चीज़ जल्दी खराब होती है या उपयोग नहीं होती। “महंगा” चीज़ लंबे समय तक चलती है और सच में काम आती है। प्रति-उपयोग सोच से यह तुलना आसान हो जाती है।


इसे कैसे करें (How)

चरण 1: कीमत लिखें

शिपिंग/डिलीवरी/एक्स्ट्रा चार्ज हो तो जोड़ दें—क्योंकि वही आपका असली खर्च है।

चरण 2: “उपयोग” को आसान तरीके से परिभाषित करें

उपयोग का मतलब हो सकता है:

  • एक दिन पहनना
  • एक बार क्लास/जिम/लाइब्रेरी ले जाना
  • एक बार पकाना/पीना
  • एक बार असाइनमेंट में इस्तेमाल करना

चरण 3: अनुमान लगाएँ (बहुत ईमानदारी से)

ट्रिक: आशावादी नहीं, साधारण अनुमान।
अगर मन कहे “बहुत यूज़ होगा”, तो खुद से पूछें:

  • पिछले महीने मैंने ऐसा कुछ कितनी बार किया?
  • मेरे पास पहले से ऐसा क्या है?
  • इसे रखने/धोने/चार्ज करने का झंझट कितना है?

चरण 4: प्रति-उपयोग कीमत निकालें

कैलकुलेटर से 10 सेकंड में हो जाता है।
फिर बस इतना पूछें: “क्या यह प्रति-उपयोग कीमत मुझे ठीक लगती है?”


उदाहरण (Example)

उदाहरण 1: रोज़मर्रा वाली चीज़

मान लीजिए एक बैकपैक €60 का है। आप सोचते हैं कि आप इसे हफ्ते में 4 दिन कॉलेज ले जाएंगे।
अगर आप इसे 1 साल तक इस्तेमाल करते हैं (लगभग 50 हफ्ते):

  • अनुमानित उपयोग = 4 × 50 = 200 उपयोग
  • प्रति-उपयोग कीमत = 60 ÷ 200 = €0.30 प्रति उपयोग

यह सुनने में “काफी ठीक” लग सकता है—क्योंकि यह आपकी दिनचर्या से जुड़ा है।

उदाहरण 2: “क्यूट लेकिन कम काम” वाली चीज़

मान लीजिए एक पार्टी टॉप €35 का है और आप सच में उसे 5 बार पहनेंगे/पहनेंगी।

  • उपयोग = 5
  • प्रति-उपयोग कीमत = 35 ÷ 5 = €7 प्रति उपयोग

यह भी गलत नहीं है—बस अब फैसला साफ है:
क्या आप €7/बार वाले आनंद के लिए तैयार हैं? अगर हाँ, तो बढ़िया। अगर नहीं, तो यह “अभी नहीं” हो सकता है।


Try this in 10 minutes

  1. अपने फोन में नोट खोलें।
  2. पिछले 48 घंटे में जो खरीदने का मन हुआ—ऐसी 3 चीज़ें लिखें।
  3. हर चीज़ के आगे दो लाइन लिखें:
    • कीमत: ___
    • मैं इसे कितनी बार उपयोग करूँगा/करूँगी: ___
  4. जल्दी से प्रति-उपयोग कीमत निकालें।
  5. हर चीज़ को बस एक टैग दें:
    • अभी खरीदूँ/खरीदूँगी
    • रुककर देखूँ/देखूँगी
    • छोड़ दूँ/दूँगी

बस। कोई बजट-शीट नहीं, कोई लंबा प्लान नहीं—सिर्फ साफ़ फैसला।


3 छोटे mini-experiments (जब भी चाहें)

1) “कम्फर्ट टेस्ट” (2 मिनट)

खुद से पूछें:
“क्या मैं इसे थका हुआ/थकी हुई दिन में भी इस्तेमाल करूँगा/करूँगी?”
अगर जवाब “शायद नहीं” है, तो उपयोग गिनती अक्सर कम निकलती है—और फैसला आसान हो जाता है।

2) “पहले से क्या है?” (5 मिनट)

जिस चीज़ को खरीदना है, उसी कैटेगरी की चीज़ें निकालकर देख लें।
फिर पूछें:

  • क्या नई चीज़ किसी असली कमी को पूरा कर रही है?
  • या बस “नई” लग रही है?

अगर यह सिर्फ “नई” है, तो उपयोग कम होने का चांस बढ़ जाता है।

3) “उपयोग बढ़ाने का छोटा प्लान” (3 मिनट)

अगर आप खरीदना चाहते/चाहती हैं, तो एक लाइन लिखें:
“मैं इसे कहाँ रखूँगा/रखूँगी ताकि यूज़ हो?”
उदाहरण: “जूते दरवाज़े के पास”, “पानी की बोतल बैग में”, “नोटबुक डेस्क पर”।
कई बार खरीद सही होती है—बस जगह गलत होती है।


एक copy‑paste टेम्पलेट (Template)

नीचे वाला टेम्पलेट अपने नोट्स में कॉपी कर लें और हर बार खरीद से पहले भर दें:

खरीद: ______________________

कुल कीमत (सब मिलाकर): ________
यह किस समस्या/ज़रूरत के लिए है?: ______________________

उपयोग की मेरी परिभाषा (1 बार = ?): ______________________
अगले 30 दिनों में अनुमानित उपयोग: ________
अगले 6 महीनों में अनुमानित उपयोग: ________

प्रति-उपयोग कीमत (6 महीनों के हिसाब से): ________

मेरे पास पहले से क्या है जो यही काम करता है?: ______________________
क्या यह चीज़ थके हुए दिन में भी यूज़ होगी?: हाँ / नहीं

अगर मैं खरीदूँ तो इसे कहाँ रखूँगा/रखूँगी?: ______________________

फैसला: अभी / 48 घंटे बाद / नहीं

छोटे संकेत: कब यह नियम खास मदद करता है

  • कपड़े/जूते: क्योंकि “सोचकर” पहनना आसान है, “असल में” पहनना मुश्किल।
  • किचन/गैजेट्स: क्योंकि इन्हें साफ़ करना/चार्ज करना भी एक छुपा खर्च है (समय/ऊर्जा)।
  • सब्सक्रिप्शन/ऐप्स: “हर महीने” छोटा लगता है, पर उपयोग कम हो तो प्रति-उपयोग बहुत बढ़ जाता है।

एकदम ईमानदार नोट (और फिर भी हल्का)

यह नियम आपको हर बार सही नहीं करेगा—और यही ठीक है।
कभी-कभी आप किसी चीज़ को कम इस्तेमाल करेंगे/करेंगी और फिर भी खुशी होगी। कभी-कभी बहुत “वैल्यू” वाली चीज़ भी अलमारी में रह जाएगी।
मकसद परफेक्शन नहीं है—बस कम पछतावा, थोड़ा ज्यादा नियंत्रण, और छोटे-छोटे जीत

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