कभी ऐसा होता है ना—चूल्हा जलाने का विचार भी थका देता है, और दिमाग में बस एक ही डर घूमता है: “अब फिर बाहर से मंगवाया तो बजट उड़ जाएगा।”
तुम अकेली/अकेले नहीं हो। और सच बताऊँ? ऐसे दिन “परफेक्ट होम-कुक्ड” का लक्ष्य नहीं, बस एक शांत, सस्ता, भरोसेमंद बैकअप चाहिए—जो तुम्हें भूख, अपराधबोध और खर्च के डर तीनों से बचा दे। आज हम वही बनाएँगे: Too tired to cook वाले दिनों के लिए एक छोटा-सा प्लान, जिसे निभाना आसान हो।
“तैयार रहना” का मतलब ओवर-प्लानिंग नहीं है
मैंने वो दौर देखा है जब मैं बैंक ऐप खोलने से भी बचती थी—क्योंकि स्क्रीन पर नंबर नहीं, बस चिंता दिखती थी। और ऐसे ही दिनों में खाना भी “टास्क” बन जाता है। फिर मन करता है कुछ भी मंगवा लो, बाद में देखेंगे। लेकिन बाद में वही भारीपन लौट आता है।
इसीलिए यह प्लान खाना बनाने की प्रेरणा पर नहीं, थकान के दिन की सच्चाई पर टिका है। तुम थकी हो तो तुम थकी हो—बस।
तुम्हारा बैकअप प्लान: “3 चीज़ें, 10 मिनट, 0 गिल्ट”
यह छोटा सा नियम बहुत मदद करता है:
- 3 चीज़ें: एक बेस + एक प्रोटीन + एक “कुछ स्वाद/क्रंच”
- 10 मिनट: इतना ही समय, उससे ज़्यादा नहीं
- 0 गिल्ट: यह “जुगाड़” नहीं—यह देखभाल है
अब इसे असली खाने में बदलते हैं।
बेस (जो घर में अक्सर होता है)
थकान वाले दिन बेस वही चुनो जो सबसे कम मेहनत माँगे:
- रोटी/पराठा (कल का भी चलेगा)
- चावल (बचा हुआ तो बोनस)
- ब्रेड/पाव
- ओट्स/दलिया
- इंस्टेंट/सादा पोहा-उपमा (अगर तुम्हें सूट करे)
- खिचड़ी की “ड्राय” सामग्री (चावल+दाल) हमेशा
प्रोटीन (पेट और मन—दोनों को स्थिर करता है)
यहाँ “फैंसी” नहीं, “सस्टेनेबल” चाहिए:
- दही/छाछ
- अंडा (अगर खाते हो)
- दाल (बची हुई/टिफिन वाली)
- चना/राजमा (उबला हुआ या कैन वाला)
- पनीर/टोफू (थोड़ा-सा भी काफी)
- मूंगफली/चने की दाल/भुना चना
स्वाद/क्रंच (ताकि खाने जैसा लगे, मजबूरी जैसा नहीं)
- अचार, चटनी, सॉस
- प्याज़-टमाटर-नींबू (बस काटना)
- भुने पापड़/मखाने
- ककड़ी/गाजर जैसा कुछ कच्चा
- थोड़ी सी फ्रोज़न सब्ज़ी (तवा पर 5 मिनट)
अब 5 “थकान वाले” कॉम्बो (जिनमें सोचने की जरूरत नहीं)
इनका मकसद एक ही है: तुम्हें तुरंत राहत।
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दही-रोटी-आचार प्लेट
रोटी + दही + अचार/चटनी। अगर ऊर्जा हो तो ऊपर से थोड़ा जीरा/काला नमक। यह वो खाना है जो शरीर को कहता है: “ठीक है, तुम सुरक्षित हो।” -
बचा चावल + दाल = मिनटों में दाल-चावल बाउल
दाल गरम, चावल गरम। ऊपर से नींबू/प्याज़। जब कुछ भी “कुक” करने की ताकत नहीं होती, यह सबसे कम निर्णय वाला विकल्प है। -
अंडा/चना “मिक्स” टोस्ट
ब्रेड पर जो भी है: उबला अंडा मैश + नमक/मिर्च, या उबला चना + नींबू + प्याज़। बस। यह पेट को शांत करता है और अगले दिन की भूख-पागलपन से भी बचाता है। -
ओट्स/दलिया—सैवोरी मोड
मीठा नहीं चाहिए तो ओट्स में नमक, थोड़ा घी/तेल, जो सब्ज़ी/फ्रोज़न मिक्स है, डाल दो। 8–10 मिनट में “वास्तविक खाना” बन जाता है। -
“खिचड़ी इमरजेंसी”
चावल+दाल + नमक + हल्दी—बस प्रेशर कुकर/पॉट में। थकान में भी यह कम से कम कदमों वाला, सबसे ज़्यादा भरोसेमंद खाना है। (और अगले दिन के लिए भी बच जाता है।)
एक छोटा सा नियम जो बजट को बचाता है (और दिमाग को भी)
थकान वाले दिन खर्च अक्सर खाने से नहीं, निर्णय की थकान से बढ़ता है। इसलिए अपने लिए एक “तैयार जवाब” रखो:
- “आज मेरा बैकअप प्लान ही खाना है।”
बस इतना। कोई बहस नहीं, कोई खुद को समझाना नहीं।
अगर तुम्हें ट्रैकिंग मदद करती है, तो इसे सजा की तरह मत देखो। मुझे Monee जैसे ऐप में बस एक लाइन लिख देना मददगार लगा—“थकान वाला खाना”। रकम नहीं, बस कैटेगरी। इससे दिमाग में यह कहानी बनती है: मैं बिगड़ी नहीं हूँ, मैं अपने लिए सिस्टम बना रही हूँ। और वही चिंता थोड़ी ढीली पड़ती है।
तुम्हारा “बैकअप किट” (बहुत छोटा, बहुत काम का)
यह कोई भारी-भरकम लिस्ट नहीं। बस 6 चीज़ें, जो अक्सर काम आती हैं:
- दही या छाछ
- एक प्रोटीन (अंडा/चना/दाल में से कोई)
- चावल या ब्रेड
- अचार/चटनी
- नींबू/प्याज़ (जो टिकते हैं)
- फ्रोज़न सब्ज़ी (या कोई आसान सब्ज़ी)
इतना ही। तुम कोई नया इंसान बनने नहीं आई हो—बस अपने थकान वाले दिनों को थोड़ा नरम बनाने आई हो।
Start here if this feels hard: आज बस एक “बैकअप कॉम्बो” चुनकर उसे अपने फोन के नोट्स में लिख दो।

